हल्की गतिविधि और कम बैठे रहने की आदतें
लगातार बैठे रहने से शरीर सुन्न हो जाता है। रोज़मर्रा के कामों के बीच थोड़ी सी गतिविधि जोड़कर, हम अपने शरीर को हल्का और तरोताज़ा रख सकते हैं।
शहरी जीवन और गतिहीनता
बेंगलुरु का ट्रैफिक हो या दिल्ली में ऑफिस का डेस्क, हम अपना ज़्यादातर समय बैठे हुए बिताते हैं। शरीर को डिज़ाइन ही चलने-फिरने के लिए किया गया है।
हमारा उद्देश्य आपको भारी जिम वर्कआउट के लिए मजबूर करना नहीं है, बल्कि बस इतना याद दिलाना है कि दिन भर में छोटे-छोटे मूवमेंट भी बड़ा फर्क ला सकते हैं।
दिन भर में सहज गतिविधि (एक उदाहरण)
सुबह का समय
उठने के बाद शरीर को हल्का सा स्ट्रेच करें (खींचें)। अगर मुमकिन हो, तो घर के आस-पास या बालकनी में 10 मिनट टहलें। ताज़ी हवा दिन की अच्छी शुरुआत करती है।
ऑफिस या काम के दौरान
अगर आप लगातार कंप्यूटर पर काम कर रहे हैं, तो अलार्म लगा लें। हर एक घंटे में उठें। फोन पर बात करते समय कुर्सी पर बैठने के बजाय कमरे में टहलते हुए बात करें। सीढ़ियों का उपयोग करें, लिफ्ट का नहीं।
दोपहर का भोजन
लंच करने के तुरंत बाद अपनी सीट पर वापस न बैठें। ऑफिस की इमारत के नीचे या घर की छत पर 5 मिनट की बहुत धीमी सैर करें।
शाम का समय
काम खत्म होने के बाद, परिवार के साथ बाज़ार तक पैदल जाना या पास के पार्क में टहलना न केवल शरीर बल्कि मन को भी दिन भर के तनाव से मुक्त करता है।
कठोर नियमों के बिना बदलाव
याद रखें, गतिविधि का मतलब हमेशा पसीना बहाना नहीं होता। इसका मतलब है अपने शरीर को स्थिर अवस्था से बाहर निकालना। अगर आप आज थकान महसूस कर रहे हैं, तो आराम करें। अपने शरीर की सुनें। छोटे और सहज कदम हमेशा लंबे समय तक चलते हैं।